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गर्भावस्था में तेजी से बढ़ी स्तन की गांठ बनी खतरे की घंटी: सुरक्षित सर्जरी से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों स्वस्थ

एसएमसी हॉस्पिटल के डॉ प्रदीप साहू व डॉ प्रीति साहू ने पूरी सावधानी और विशेष एनेस्थीसिया मॉनिटरिंग के साथ किया सफल ऑपरेशन


धमतरी। गर्भावस्था के दौरान स्तन में तेजी से बढऩे वाली गांठ को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। धमतरी में सामने आए एक जटिल मामले ने यह साबित किया कि सही समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। 21 वर्षीय गर्भवती महिला को लगभग चार महीने की प्रेग्नेंसी में थी। उसके बाएं स्तन में पिछले लगभग एक वर्ष से एक छोटी गांठ थी, लेकिन गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण वह अचानक तेजी से बढऩे लगी। कुछ ही हफ्तों में स्तन का आकार असामान्य रूप से बड़ा हो गया, त्वचा में अत्यधिक खिंचाव आने लगा और दर्द भी शुरू हो गया। जांच में गांठ का आकार लगभग 10 से 12 सेंटीमीटर पाया गया। सोनोग्राफी और एफ एन ए सी जांच में यह फाइब्रोएडेनोमा नामक गांठ प्रतीत हुई, लेकिन इसके तेजी से बढऩे के कारण डॉक्टरों को फायलोड्स ट्यूमर जैसी गंभीर संभावना से भी इंकार नहीं था। परिजनों के अनुसार, गर्भावस्था में ऑपरेशन के दौरान गर्भपात (मिसकैरेज) का खतरा बताते हुए कई अस्पतालों ने सर्जरी करने से मना कर दिया था। लगातार बढ़ती गांठ के कारण मरीज मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी से गुजर रही थी। इसके बाद मरीज ने धमतरी के एसएमसी हॉस्पिटल में वरिष्ठ सर्जन डॉ. प्रदीप साहू एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति साहू से संपर्क किया। लगभग 20 वर्षों से गर्भवती महिलाओं की जटिल सर्जरी का अनुभव रखने वाले डॉ. प्रदीप साहू ने पूरी सावधानी और विशेष एनेस्थीसिया मॉनिटरिंग के साथ सफल ऑपरेशन किया।सर्जरी के दौरान लगभग एक किलो 700 ग्राम वजन की विशाल गांठ को सुरक्षित तरीके से निकाला गया। ऑपरेशन के बाद गर्भस्थ शिशु की विशेष सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें भ्रूण पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य पाया गया। मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहे तथा मरीज की रिकवरी भी संतोषजनक रही। डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव के कारण पहले से मौजूद स्तन की गांठ तेजी से बढ़ सकती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो स्तन की संरचना खराब हो सकती है, दर्द बढ़ सकता है और भविष्य में जटिल सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

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