कुरूद में हुआ प्रांतीय शिशु वाटिका आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन
142 प्रशिक्षार्थियों को बाल शिक्षा एवं संस्कारों से कराया गया अवगत

कुरूद। सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुरूद में 14 से 30 मई तक आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका आचार्य सामान्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन हुआ। छत्तीसगढ़ प्रांत के 25 जिलों से आए 142 प्रशिक्षार्थियों, 12 शिक्षिकाओं एवं प्रशिक्षण दल की सहभागिता ने इस वर्ग को विशेष आयाम प्रदान किया। प्रशिक्षार्थी ने सामूहिक व्यायाम, योग, समता योगचाप, खेल, नि:युद्ध एवं सामूहिक गीतों की प्रस्तुति देकर प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का प्रदर्शन किया। वर्ग प्रमुख रामकुमार वर्मा ने वर्ग वृत्त प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण वर्ग में बाल शिक्षा, संस्कार निर्माण, शिक्षण पद्धति एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में प्रदेशभर से आए आचार्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। मुख्य अतिथि मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष विवेक शिंदे ने अपने उद्बोधन में शिशु वाटिका की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए शिशु शिक्षा की 12 प्रमुख शैक्षिक व्यवस्थाओं का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था में दिए गए संस्कार एवं शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की सुदृढ़ नींव रखते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विवेकानंद शिशु संस्कार समिति कुरूद की सदस्य सिंधु बैस ने भीषण गर्मी के बीच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षार्थियों के समर्पण एवं अनुशासन की सराहना की। समारोह में प्रादेशिक सचिव लक्ष्मणराव मगर, समिति सचिव एलपी गोस्वामी, संगठन मंत्री डॉ. देवनारायण साहू, समिति अध्यक्ष देवनाथ सोनी, उपाध्यक्ष तिलोकचंद जैन, सह सचिव नेमीचंद बैस, सदस्य रामायणलाल साहू, नरेश यादव, राजिम विभाग समन्वयक, पोखन साहू, ग्राम भारती अध्यक्ष दीनबंधु सिन्हा, सुनील यदु, रामजी साहू, तुलाराम यादव सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। विद्यालय के प्राचार्य श्रीनिवास शुक्ला, प्रधानाचार्य जितेंद्र निर्मलकर, शिशु वाटिका प्रमुख रेखा तिवारी, उर्मिला कश्यप, प्रतिभा पांडे, उषा विद्यावेणु साहू एवं अन्य प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षण वर्ग के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में राजिम विभाग प्रमुख एवं विवेकानंद शिशु संस्कार समिति के सदस्य वेदनाथ चंद्राकर ने आभार व्यक्त किया।