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बच्चों में सिकल सेल एवं गैर-संचारी रोगों की रोकथाम पर जिला स्तरीय मंथन

रोगी सहायता समूह की प्रथम जिला स्तरीय बैठक में विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव

धमतरी- जिला स्वास्थ्य समिति धमतरी के तत्वावधान में रोगी सहायता समूह विषयक प्रथम जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य विषय बच्चों में गैर-संचारी रोगों, विशेष रूप से सिकल सेल रोग एवं बाल मधुमेह की रोकथाम, समय पर पहचान, जांच एवं उपचार रहा। इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन जिला स्वास्थ्य समिति, मिलकर निशान, तीजगढ़ एवं एकम फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से किया गया।
बैठक में सिकल सेल रोग से प्रभावित बच्चों और उनके परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, रोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा समय पर उपचार सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सिकल सेल एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसकी समय रहते पहचान और उचित उपचार से रोगियों को सामान्य जीवन जीने में सहायता मिल सकती है। साथ ही बाल मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महापौर रामू रोहरा ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने सिकल सेल एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता से ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.एल. कौशिक ने जिले में सिकल सेल रोग की वर्तमान स्थिति एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी। डॉ. आदित्य सिन्हा, नोडल अधिकारी सिकल सेल एवं ब्लड बैंक ने रोग की पहचान, जांच प्रक्रिया और उपचार व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर डॉ. गजेंद्र (स्वास्थ्य विशेषज्ञ, यूनिसेफ छत्तीसगढ़), डॉ. प्रिया कंवर (डीपीएम), डॉ. अस्कस्या (यूनिसेफ), डॉ. श्रीकांत चंद्राकर (एनसीडी सलाहकार) एवं डॉ. हेमेश्वर जोशी (रमाचा सलाहकार) ने भी अपने विचार रखते हुए सिकल सेल एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के प्रभावी प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता तथा रोगी सहायता समूहों की भूमिका पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सिकल सेल एवं बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को नियमित परामर्श, स्वास्थ्य सेवाएं तथा आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए रोगी सहायता समूहों को और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा। साथ ही स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सिकल सेल मुक्त समाज के निर्माण हेतु समन्वित प्रयास करने का संकल्प लिया।

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