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पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा और अनुराग मसीह का कार्यकाल रहा मिसाल, जनसेवा और प्रभावी संचालन के लिए किया जाता हैं याद

अपने पद की गरिमा को बनाए रखते हुए जनहित और विकास को दी थी प्राथमिकता


धमतरी। नगर निगम के इतिहास में कुछ ऐसे जनप्रतिनिधि रहे हैं, जिन्होंने अपने पद की गरिमा को बनाए रखते हुए जनहित और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा और अनुराग मसीह का नाम भी ऐसे ही जनप्रतिनिधियों में शामिल है, जिनका कार्यकाल आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर निगम में सभापति का पद केवल बैठकों की अध्यक्षता तक सीमित नहीं होता, बल्कि परिषद की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करना, पार्षदों को अपनी बात रखने का अवसर देना, नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना तथा जनहित से जुड़े प्रस्तावों पर सकारात्मक और निष्पक्ष निर्णय की दिशा में परिषद का मार्गदर्शन करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। एक सक्षम सभापति निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा और अनुराग मसीह ने अपने कार्यकाल में इन जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी गंभीरता और दक्षता के साथ किया। दोनों ने सदन की कार्यवाही को अनुशासित, गरिमामय और प्रभावी ढंग से संचालित किया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाए रखते हुए उन्होंने नगरहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी और परिषद की बैठकों को सकारात्मक परिणाम तक पहुंचाने का प्रयास किया। दोनों पूर्व सभापति केवल निगम कार्यालय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं को सुना और उनके समाधान के लिए प्रयासरत रहे। वार्डों का नियमित भ्रमण, नागरिकों से सीधा संवाद और विकास कार्यों की सतत समीक्षा उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही। इसी कारण वे आम जनता के साथ-साथ पार्षदों के बीच भी सम्मान के पात्र बने। नगर निगम के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और नागरिक मानते हैं कि राजेंद्र शर्मा और अनुराग मसीह का कार्यकाल सदन की गरिमा, पारदर्शिता और जनहितकारी सोच के लिए याद किया जाता है। उनके नेतृत्व में परिषद की कार्यवाही व्यवस्थित ढंग से संचालित होती थी और विकास से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया जाता था। आज भी शहर में जब नगर निगम के प्रभावी संचालन और सफल सभापतियों की चर्चा होती है, तब राजेंद्र शर्मा और अनुराग मसीह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी सक्रिय कार्यशैली, जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता और पद की जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण उन्हें नगर निगम के सफल और यादगार सभापतियों की श्रेणी में स्थापित करता है।

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