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धमतरी जिले में पर्यटन विकास को दी जा रही प्राथमिकता : रुद्रेश्वर कॉरिडोर से ठेमली आइलैंड तक पर्यटन परियोजनाओं पर फोकस, गंगरेल में बोटिंग-कयाकिंग और सिहावा के सप्तऋषि आश्रम तक बढ़ रहा आकर्षण

धमतरी पर्यटन को मिल रही नई पहचान, नवाचारों और विकास कार्यों से बदल रही जिले की तस्वीर


धमतरी। हर वर्ष 27 सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। साल 2026 में विश्व पर्यटन दिवस की थीम डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पर्यटन को नया रूप देना है। यह थीम पर्यटन के भविष्य और विकास को बेहतर बनाने में तकनीक, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर जोर देती है। धमतरी जिला पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से अग्रसर है। आज पर्यटन दिवस पर जिले के पर्यटन विकास, संभावनाओं पर गौर किया गया।
प्राकृतिक सौंदर्य, जलाशयों, झरनों, जंगलों और धार्मिक आस्था के केंद्रों से समृद्ध धमतरी जिला अब छत्तीसगढ़ के उभरते पर्यटन हब के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है, वहीं साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म), धार्मिक पर्यटन और ईको-टूरिज्म को एक साथ विकसित करने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। गंगरेल जलाशय से लेकर सिहावा के सप्तऋषि आश्रम और बरदिहा लेक व्यू रिसॉर्ट तक कई स्थान पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं भविष्य में रुद्रेश्वर कॉरिडोर, ठेमली आइलैंड, आइलैंड स्टे, होम स्टे, बोट विलेज जैसे कई नवाचार भी आकर्षक का केन्द्र होंगे। वहीं गंगरेल, मुरुमसिल्ली, दुधावा, सोंढुर बांध भी पर्यटन के आधार स्तम्भ है।
रुद्रेश्वर कॉरिडोर से मिलेगा नया धार्मिक पर्यटन केंद्र, संवरेगा महानदी का उद्गम स्थल
जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले रुद्रेश्वर महादेव क्षेत्र को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास तेज किए गए हैं। वहीं महानदी के उद्गम स्थल पर लगभग 26 करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। जिसमें एसईसीएल के सीएसआर फंड से 20 करोड़ की राशि मिली है। वहीं कलेक्टर अबिनाश मिश्रा द्वारा तैयार डीपीआर को शासन द्वारा स्वीकृति प्रदान करते हुए 6 करोड़ की स्वीकृति दी है। इस प्रकार 26 करोड़ से वाणारसी के घाट के तर्ज पर महानदी के उद्गम स्थल को नया रुप दिया जायेगा। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और इस क्षेत्र को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करना है। यहां सौंदर्यीकरण, पहुंच मार्ग और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
गंगरेल बना एडवेंचर टूरिज्म की राजधानी
गंगरेल जलाशय अब केवल पिकनिक स्थल नहीं, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यहां बोटिंग, रुद्री में कयाकिंग और अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियां पर्यटकों को रोमांच का अनुभव करा रही हैं। इसके साथ ही बोट चैंपियनशिप जैसे आयोजन जल पर्यटन को नई पहचान दे रहे हैं, जिससे प्रदेश के साथ अन्य राज्यों से भी पर्यटक आकर्षित हो रहे हैं।
ठेमली आइलैंड और बोट विलेज की अनूठी पहल
गंगरेल क्षेत्र के ठेमली आइलैंड को पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं प्रस्तावित बोट विलेज की अवधारणा पर्यटकों को जलाशय के बीच प्रकृति के करीब रहने का अलग अनुभव देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे जिले में पर्यटन का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।
डूबान के 32 गांवों को संवारकर बनाया जायेगा पर्यटन का नया हब
डूबान के 32 गांवों को संवारकर पर्यटन का नया हब बनाने और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने प्रशासन ने रोडमैप तैयार किया है। खासकर कनेक्टिविटी पर फोकस है। वहीं ग्रामीणों, को मूलभूत सुविधा बेहतर ढंग से उपलब्ध कराने पर खास तवज्जों दी जा रही। इससे जल्द ही डूबान की तस्वीर बदली नजर आएगी। तिर्रा के ग्रामीण नाव चलाने में दक्ष है इसलिए तिर्रा को बोट विलेज के रुप में पहचान दिलाई जाएगी। यहां बोट बनाने से लेकर डेब्लप करने और ट्रेनिंग देने का काम होगा। वहीं हरफर में नदी किनारे का प्राकृतिक सौंदर्य आकर्षित करता है, इसलिए यहां होम स्टे के साथ पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। ढेमली आइलैण्ड आने वालों को हरफर में होम स्टे की सुविधा रास आएगी।
अकलाडोंगरी में विकसित होगा प्रमुख बाजार, बरबांधा, कोड़ेगांव रैय्यत भी होंगे पर्यटन के नये केन्द्र
अकलाडोंगरी ग्राम डूबान के सेंटर में है इसलिए इसे प्रमुख बाजार के रुप में विकसित किया जाएगा। यहां रेवन्यू कोर्ट, बैंक, मिनी स्टेडियम जैसी सुविधा का सीधा फायदा पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों को मिलेगा। तुमाबुजुर्ग के आइलैण्ड को संवारा जाएगा। ग्राम सटियारा की पहचान अपनी अलग संस्कृति के लिए है। यहां गांधी मंदिर में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। बरबांधा, कोड़ेगांव रैय्यत को भी पर्यटन के नये केन्द्र के रुप में पहचान दिलाने काम होंगे। गांवों के लिए बनी इन विशेष योजनाओं के अलावा रोजगार के लिए मछलीपालन, बकरीपालन को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं ग्रामीणों की मांग अनुसार पुल, सड़क के कार्य करने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। होम स्टे को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
सिहावा के सप्तऋषि आश्रम में बढ़ रहा श्रद्धालुओं का रुझान
महानदी उद्गम क्षेत्र सिहावा स्थित सप्तऋषि आश्रम धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह स्थल श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों दोनों को आकर्षित कर रहा है। बरदिहा क्षेत्र में विकसित लेक व्यू रिसॉर्ट भी जिले के पर्यटन का केन्द्र है। यहां शांत वातावरण, प्राकृतिक दृश्य और जलाशय का मनोरम नजारा पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
नरहरा जलप्रपात और उदंती-सीतानदी की बढ़ी पहचान
बरसात के मौसम में नरहरा जलप्रपात हजारों पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। वहीं उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ईको-टूरिज्म, वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति भ्रमण की गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जंगल पर्यटन को नई पहचान मिल रही है।
पर्यटन मानचित्र पर मजबूत होगी धमतरी की पहचान
जिला प्रशासन का मानना है कि प्राकृतिक, धार्मिक, साहसिक और ग्रामीण पर्यटन के समन्वित विकास से धमतरी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन जिलों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा। रुद्रेश्वर कॉरिडोर, ठेमली आइलैंड, बोट विलेज, गंगरेल की जल क्रीड़ा गतिविधियां, सिहावा के आध्यात्मिक स्थल जैसी परियोजनाएं जिले के पर्यटन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
पहली बार हुआ बोट चैम्पियनशीप, सोशल मीडिया, इंफ्लूएंशर मीट का आयोजन, कायकिंग का मिल रहा नया अनुभव
जिले में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में कई नवाचार पर्यटन की दिशा में हो रहे है। जिले में पहली बार गंगरेल बांध में बोट चैम्पियनशीप का आयोजन हुआ। जिसकी चर्चा प्रदेश व देश में हुई। पहली बार सोशल मीडिया, इंफ्लूएंशर मीट का आयोजन हुआ जिसमें जिले के पर्यटन को सोशल मीडिया की दुनिया में प्रसारित करने का अवसर प्रशासन द्वारा दिये गये। रुद्री में कायकिंग शुरु होने से रोमांच का नया अनुभव लोगो को मिल रहा है।
बदहाल सड़के, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता में सुधार की आवश्यकता
जिले में पर्यटन विकास के साथ ही कई खामियां भी है. जिले के अधिकांश पर्यटन स्थलो में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहती। जिले के सभी पर्यटन स्थलों को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में जरुरी है। सुरक्षा जवान तैनात होने चाहिए, सड़के दुरुस्त होनी चाहिए, स्वच्छता व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, गंगरेल स्थित मानव वन व मचान हट की बदहाल की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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