हमारी संस्कृति केवल उत्सवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता में बसती है- पं राजेश शर्मा
अलबेलो गुजरात के रंग, में झूमे गरबा प्रेमी

आराध्य गरबा के आयोजक धर्मप्रेमी समाजसेवी भजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पं राजेश शर्मा ने कहा कि गरबा भारतीय संस्कृति में मां की आराधना का महोत्सव है
धमतरी। आराध्य गरबा के दूसरे दिन अलबेलो गुजरात थीम पर मल्टीकलर परिधानों में सजे गरबा प्रेमियों ने उत्साह के साथ मां की आराधना की। गुजराती गरबा की धुनों पर थिरकते कदमों ने गुजरात की रंगीन संस्कृति और पारंपरिक उल्लास की छटा बिखेरी। आयोजक भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पंडित राजेश शर्मा के साथ प्रतिभागियों ने भक्ति और उत्साह से आयोजन को जीवंत बनाया।
प्रतिभागियों में विनरो को अलग अलग कैटेगरी में पंडित राजेश शर्मा द्वारा प्राइज वितरण किया गया
आज तीसरे दिन छत्तीसगढ़ की माटी के रंग में रंगेगा आराध्य गरबा
आराध्य गरबा के तीसरे दिन ‘ग्रीन कलर’ के साथ ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ थीम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस दिन आयोजन में छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकजीवन की सादगी, पारंपरिक संस्कारों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। गुजरात की रंगीन परंपराओं के बाद अब गरबा के मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दी जाएगी।
हरे रंग को प्रकृति, हरियाली और नई ऊर्जा का प्रतीक मानते हुए इस थीम के माध्यम से अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने का संदेश दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं, पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक गौरव को उत्सव के रंगों से जोड़ने का प्रयास होगा। थीम का उद्देश्य केवल परिधानों के रंग तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और नई पीढ़ी में अपनी विरासत को जानने-समझने की भावना जगाना है।
*संस्कृति से जुड़ाव ही आराध्य गरबा की विशेषता : राजेश शर्मा*
आयोजक भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पं राजेश शर्मा ने कहा कि आराध्य गरबा में हर दिन की थीम के पीछे एक सांस्कृतिक संदेश है। ‘अलबेलो गुजरात’ के माध्यम से गुजरात की रंगीन परंपरा को प्रस्तुत किया गया, वहीं ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ के जरिए हमारी छत्तीसगढ़ की पहचान, संस्कार और लोकपरंपराओं को सामने लाने का प्रयास है। हमारी संस्कृति केवल उत्सवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता में बसती है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचाने और अपनी परंपराओं पर गर्व करे, यही ऐसे आयोजनों की सार्थकता है। मां दुर्गा की आराधना के साथ विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना भारतीय परंपरा की खूबसूरती है। आराध्य गरबा के माध्यम से भक्ति, संस्कृति और सामाजिक को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
राजेश शर्मा ने कहा कि मां दुर्गा की आराधना हमें शक्ति, साहस, सेवा और सद्भाव का संदेश देती है। भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी विविधता और परंपराओं में निहित है। गुजरात का गरबा हो या छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराएं, प्रत्येक की अपनी विशिष्ट पहचान है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने गरबा प्रेमियों की सहभागिता को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि आयोजन की सार्थकता तभी है, जब यहां से लोग भक्ति, सकारात्मकता और सांस्कृतिक गौरव की अनुभूति लेकर जाएं।