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सार्थक स्कूल में हिंदी दिवस पर हुए विभिन्न आयोजन

मानसिक दिव्यांग प्रशिक्षण एवं सेवा केंद्र सार्थक स्कूल धमतरी में हिंदी दिवस के अवसर पर सार्थक के विशेष बच्चे यज्ञदत्त, नेमेश, श्वेता, मनीष, ईशु, एकलव्य, हर्षिता, वत्सला, प्रीती, मनीषा ने हिंदी हमारी भाषा ही नहीं बल्कि संस्कृति, साहित्य और एकता की आत्मा हैं। हिंदी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि पहचान और गर्व का प्रतीक हैं।इस सुविचार को सुलेख रूप में लिखकर अपनी अपनी प्रतिभा दिखाई। सार्थक सचिव स्नेहा राठौड़ ने बताया कि, इन विशेष बच्चों में बुद्धिलब्धि कम हैं और हाथ में सही ग्रिप नहीं होने कि वजह से पेंसिल पकड़ने में दिक्कत होती हैं। प्रशिक्षकों के नियमित अभ्यास कराने से जहां बच्चों ने एक अक्षर से शुरुवात की थी वहां आज एक पेज भरके सुलेख लिखकर सुखद हैरत में डाल दिया है। कुछ बच्चों के हाथ में कंपन हैं, उसको कंट्रोल कर सुलेख लिखने में आश्चर्यजनक सुधार आया है और ये बहुत बड़ी उपलब्धि हैं और परिणामतः बच्चे हिंदी दिवस पर सुलेख लिखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस अवसर पर प्रशिक्षक मैथिली गोडे, देविका दीवान, काजल रजक ने बच्चों को सुलेख लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।

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