Uncategorized

श्रद्धेय सुरजीत नवदीप मेरे गुरु, मेरे पथप्रदर्शक -कविता योगेश बाबर

वे न केवल हास्य व्यंग्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित कवि थे


धमतरी। जीवन में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो केवल अपने समय तक सीमित नहीं रहते बल्कि पीढिय़ों तक प्रेरणा बनते हैं। वे केवल पढ़ाते नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। मेरे लिए ऐसे ही प्रेरणास्रोत रहे श्रद्धेय सुरजीत नवदीप। वे न केवल हास्य व्यंग्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित कवि थे बल्कि एक आदर्श शिक्षक और संवेदनशील व्यक्तित्व भी थे। विद्यालयीन जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनके स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद का प्रभाव मेरे जीवन की हर दिशा में दिखाई देता है। धमतरी स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जब मैं शिक्षा प्राप्त कर रही थी तब नवदीप सर हमारे गुरु थे। उनके पढ़ाने का ढंग अनोखा था। वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहते बल्कि हर कक्षा को एक उत्सव में बदल देते थे। बच्चों के मनोबल को बढ़ाने के लिए हास्य का ऐसा पुट लगाते कि पढ़ाई बोझ न लगे बल्कि आनंदमय अनुभव बने। उनके व्याख्यानों में साहित्य, समाज और जीवन के मूल्य एक साथ मिल जाते। उनकी कक्षाओं में बैठना केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं बल्कि जीवन की बारीकियों को समझना था। सुरजीत नवदीप जी हास्य व्यंग्य के क्षेत्र में एक विख्यात नाम थे। उनकी कविताओं में समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार भी होता और साथ ही हल्के-फुल्के हास्य का स्पर्श भी। उनकी कविताएं हंसी के साथ सोचने पर मजबूर करती थीं। व्यंग्य के माध्यम से वे समाज की बुराइयों को सामने लाते लेकिन किसी को चोट पहुंचाए बिना। मंचों पर उनका व्यक्तित्व हमेशा श्रोताओं का मन मोह लेता। मेरे लिए गर्व की बात यह थी कि इतने बड़े कवि ही नहीं बल्कि श्रेष्ठ शिक्षक मेरे जीवन के पथप्रदर्शक रहे। मेरे दादा स्व. भोपाल राव पवार मध्य प्रदेश शासन में शिक्षा मंत्री थे। शिक्षा और संस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव था। इसी कड़ी में उनका संबंध श्रद्धेय नवदीप जी से बना। यह संबंध केवल औपचारिक नहीं था बल्कि आत्मीय और मधुर था। दोनों में शिक्षा के प्रति समर्पण की समान भावना थी। साहित्यिक और सांस्कृतिक विषयों पर अक्सर संवाद होता। मेरे दादा उन्हें एक सम्माननीय कवि और शिक्षक मानते थे जबकि नवदीप जी मेरे दादा का आदरपूर्वक उल्लेख करते। यह आत्मीयता केवल दो पीढिय़ों तक सीमित नहीं रही। आज भी हमारे परिवार और नवदीप जी का संबंध उतना ही स्नेहपूर्ण है।
व्यक्तिगत स्नेह और संबंध
विद्यालयीन जीवन के बाद भी नवदीप जी ने मुझे अपने आशीर्वाद से वंचित नहीं किया। जब मैं जिला पंचायत धमतरी की सदस्य निर्वाचित हुई और बाद में वन विभाग की सभापति बनी तब मेरे कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर उनका आना मेरे लिए एक अविस्मरणीय स्मृति है। उन्होंने न केवल उपस्थिति दर्ज कराई बल्कि मुझे खुले मन से आशीर्वाद दिया। उनके आशीर्वाद के शब्द आज भी मेरे लिए प्रेरणास्रोत हैं। यह क्षण मेरे जीवन में गुरुझ्रशिष्य संबंध की गहराई और आत्मीयता का प्रमाण था। नवदीप जी का शिक्षण केवल विषय तक सीमित नहीं था। वे छात्रों में संस्कार, अनुशासन और मानवीय संवेदनाएं विकसित करते थे। उनकी उपस्थिति से विद्यालय का वातावरण प्रफुल्लित हो जाता। वे हर छात्र को प्रोत्साहित करते चाहे वह पढ़ाई में कितना ही साधारण क्यों न हो। उनका यह मानना था कि हर बच्चा प्रतिभाशाली है जरूरत है तो केवल सही दिशा देने की। मेरे सार्वजनिक जीवन की यात्रा में नवदीप जी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन निरंतर बना रहा। उनकी कविताएं मुझे सामाजिक कार्यों में सकारात्मक सोच देती रही। उनका हास्य यह सिखाता रहा कि गंभीर से गंभीर परिस्थिति को भी सहजता और धैर्य से संभालना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि साहित्य और शिक्षा समाज सुधार के सबसे बड़े साधन हैं। साहित्य और संस्कृति के संवाहक सुरजीत नवदीप जी केवल कवि या शिक्षक नहीं थे, बल्कि एक सांस्कृतिक व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने अनेक साहित्यिक मंचों को अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित किया। उनके माध्यम से धमतरी की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई। उन्होंने युवाओं को साहित्य की ओर प्रेरित किया। उनका योगदान छत्तीसगढ़ और देश के साहित्यिक जगत में हमेशा याद किया जाएगा। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो पाती हूं कि – विद्यालय की हर कक्षा में उनकी मुस्कान और कविताओं की गूंज अब भी स्मृतियों में जीवित है। दादा और उनके आत्मीय संबंधों की कहानियां हमारे परिवार में आज भी सुनाई जाती हैं। मेरे सार्वजनिक जीवन के आरंभिक चरण में दिया गया उनका आशीर्वाद आज भी हर नए कार्य में मेरा संबल है। श्रद्धेय श्री सुरजीत नवदीप जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। कवि, शिक्षक, संस्कारदाता, मार्गदर्शक और पारिवारिक संबंधों को निभाने वाले सज्जन व्यक्ति। मेरे जीवन में केवल गुरु नहीं रहे बल्कि एक ऐसे पथप्रदर्शक रहे जिन्होंने शिक्षा, संस्कार, साहित्य और सार्वजनिक जीवन हर क्षेत्र में मेरे कदमों को दिशा दी। उनकी स्मृतियां और आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहेंगे। यह केवल एक श्रद्धांजलि नहीं बल्कि मेरे मन की गहराइयों से निकला आभार है जो मैं अपने प्रिय गुरु, श्रद्धेय सुरजीत नवदीप जी को समर्पित करती हूं।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!