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दुर्लभ सत्संग का सप्तम एवं अंतिम दिवस श्रद्धा और शांति के भाव के साथ संपन्न

धमतरी-आमंत्रण हेरिटेज साहू सदन, रुद्री में आयोजित दुर्लभ सत्संग का सप्तम एवं अंतिम दिवस अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक शांति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धेय स्वामी श्री विजयानंद गिरि जी महाराज (ऋषिकेश) के ओजस्वी, भावपूर्ण एवं जीवनोपयोगी प्रवचनों का लाभ बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि सत्संग के प्रत्येक दिवस महिला एवं पुरुष श्रोता अलग-अलग कतारों में अनुशासित रूप से बैठकर कथा श्रवण करते रहे, जिससे पूरे आयोजन में मर्यादा, शांति और एकाग्रता बनी रही।अंतिम दिवस के प्रवचन में श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है कि केवल ज्ञान को सुनने तक सीमित न रहकर उसे अपने जीवन में धारण किया जाए। उन्होंने जीवन में दुख के महत्व को समझाते हुए कहा कि दुख मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है और आत्मबोध की ओर ले जाता है।स्वामी जी ने अपने उद्बोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भगवान कोई करने का विषय नहीं है, भगवान को केवल स्वीकार करने का विषय है। जब मनुष्य पूर्ण समर्पण और स्वीकार भाव से जीवन जीता है, तभी उसे वास्तविक शांति की अनुभूति होती है।सत्संग के दौरान एक अत्यंत भावुक और अद्भुत क्षण तब उपस्थित हुआ जब प्रवचन के बीच अचानक दो गाय मंच के समीप आईं और नमन कर शांत भाव से आगे बढ़ गईं। इस दृश्य ने पूरे पंडाल को एक अलौकिक शांति से भर दिया और सभी श्रोताओं के मन स्वतः ही भाव-विभोर हो गए।श्रद्धेय स्वामी जी ने आगे कहा कि जीवन में शांति जड़ वस्तुओं या विषयों के संग्रह से नहीं, बल्कि उनके त्याग से प्राप्त होती है।” उन्होंने गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी संयम, सेवा और भक्ति के माध्यम से भगवत प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया।कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए हलवा-पूड़ी का प्रसाद भंडारा आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
अंत में आयोजकों द्वारा सत्संग में पधारे सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं विशेष रूप से भवन सहयोग के लिए आमंत्रण हेरिटेज परिवार के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया। आयोजन समिति ने भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प दोहराया।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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