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छत्तीसगढ़-ओडि़सा महानदी जल विवाद सुलझाने 3 न्यायधीशो सहित 25 सदस्य टीम ने किया गंगरेल व माडमसिल्ली का निरीक्षण

महानदी जल उपयोग पर ट्रिब्यूनल की बैठक, चेयरमैन बेला एम त्रिवेदी ने अधिकारियों से की चर्चा

धमतरी सहित अन्य जिलों में महानदी के जल के उपयोग की स्थिति की ली बारीकी से जानकारी
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने भेंट किया मां अंगारमोती का छायाचित्र व स्मृति चिन्ह
धमतरी। छत्तीसगढ़-ओडि़सा महानदी जल विवाद सुलझाने 3 न्यायधीशो सहित 25 सदस्य टीम ने गंगरेल व माडमसिल्ली का निरीक्षण किया। महानदी जल वितरण ट्रिब्यूनल की चेयरमैन बेला एम त्रिवेदी ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान महानदी के जल उपयोग से संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की । इस दौरान उन्होंने धमतरी सहित अन्य जिलों में महानदी के जल के उपयोग की स्थिति की बारीकी से जानकारी ली। अधिकारियों द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में जल उपयोग, सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया। बैठक में ट्रिब्यूनल के सदस्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन एवं इंदरमीत कौर, उड़ीसा राज्य की टीम के सदस्य, उड़ीसा राज्य शासन एवं छत्तीसगढ़ राज्य शासन के सर्वोच्च अधिकारियों एवं सर्वोच्च न्यायालय के मान न्यायमूर्ति,जल संसाधन के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रवास के दौरान चेयरमैन श्रीमती बेला एम त्रिवेदी एवं अन्य सदस्यों ने मां अंगारमोती मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा मिश्रा ने उन्हें मां अंगारमोती का छायाचित्र भेंट की। इसके बाद ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने गंगरेल बांध में बोटिंग का आनंद लिया। वहीं मुरुमसिल्ली बांध के निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बांध के निर्माण और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुरुमसिल्ली बांध लगभग 100 वर्ष से अधिक पुराना है और आज भी मजबूती से कायम है। यह एशिया का पहला सायफन आधारित बांध माना जाता है, जिसकी ट्रिब्यूनल सदस्यों ने सराहना की। इस दौरान मुरुमसिल्ली बांध स्थित रेस्ट हाउस में लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया। जिसमें सिहावा पर्वत पर स्थित श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली, जिले में उपलब्ध चावल की विभिन्न किस्में, पारंपरिक हरेली तिहार, काष्ठ शिल्प, माटी कला, जिले में स्थापित राइस मिल, गंगरेल बांध, मिनी गोवा, राजिम कुंभ तथा चंपारण की झलक प्रस्तुत की गई, जिसे ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने रुचि के साथ देखा। कलेक्टर श्री मिश्रा ने दल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

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