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साझी मेहनत, साझा समृद्धि — ‘बिहान’ से बदल रहा ग्रामीण महिला जीवन

*धमतरी, 12 मार्च 2026/ / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त अभियान बन चुका है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसालें गढ़ रही हैं।*
*“बिहान” का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वसहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर समाज में आत्मगौरव के साथ जीवन यापन कर सकें।*
*धमतरी जिले में “बिहान” योजना के तहत बीते जुलाई माह तक 58 महिला सदस्यों को सेंट्रिंग प्लेट निर्माण एवं किराये हेतु ऋण प्रदाय किया गया, जिसके माध्यम से उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ाया है। इनमें धमतरी विकासखंड की 27, कुरूद की 15, मगरलोड की 7 एवं नगरी विकासखंड की 9 महिलाएं शामिल हैं। इन महिलाओं को समूह स्तर पर प्रकरण तैयार कर आरएफ मद से 15 हजार, सीआईएफ से 60 हजार तथा बैंक ऋण के रूप में 3 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई।*
*प्राप्त राशि से समूह की महिलाओं द्वारा 59 हजार 300 वर्गफीट सेंट्रिंग प्लेट की खरीदी की गई है। इन प्लेटों को महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित अन्य शासकीय निर्माण कार्यों और स्थानीय बाजारों में 20 से 25 रुपये प्रति वर्गफीट के किराये पर उपलब्ध करा रही हैं। इससे महिलाओं को निरंतर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है।*
*महिलाओं ने समूह की सहायता से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि नियमित बचत कर समय पर ऋण की अदायगी भी कर रही हैं। इस पहल से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।
जिला पंचायत धमतरी द्वारा इन समूहों को न केवल आर्थिक सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान से भी उन्हें सशक्त बनाया गया।*
* बिहान योजना से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। समूह आधारित कार्य प्रणाली ने उन्हें आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाया है। आज वे स्वयं की मेहनत से अपने परिवार और समाज में परिवर्तन की प्रेरणा बन रही हैं।*
*“बिहान” योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवचेतना और विकास की नई राहें खुलती हैं।*

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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