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जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल के प्रयासों से रत्नाबांधा और मुजगहन का बड़ा तालाब हुआ 85 लाईटो से प्रकाशमय


धमतरी. ग्रामीणों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जनपद क्षेत्र क्रमांक 15 के अंतर्गत आने वाले ग्राम रत्नाबांधा और मुजगहन तालाब के चारो ओर जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल के विशेष प्रयासों से स्थानीय बड़े तालाब क्षेत्र को पूरी तरह से अंधेरा मुक्त कर दिया गया है। तालाब के चारों ओर व्यापक प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) सुनिश्चित कर न केवल इसका सौंदर्यीकरण किया गया है, बल्कि ग्रामीणों को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण भी समर्पित किया गया है।
विदित हो कि यह तालाब ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या और सांस्कृतिक,धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। परंतु, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण सूर्यास्त के बाद यह पूरा क्षेत्र अंधेरे के आगोश में डूब जाता था, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को तालाब के घाटों पर जाने में असुरक्षा महसूस होती थी। जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल ने ग्रामीणों की इस दीर्घकालिक समस्या को गंभीरता से लिया। उन्होंने न केवल योजना बनाई, बल्कि धरातल पर तत्परता से कार्य करते हुए लगभग 80 से 85 विद्युत लाइट्स को तालाब के चारों ओर स्थापित करवाया। इस पहल से अब रात के समय भी तालाब का पूरा परिक्षेत्र दूधिया रोशनी से सराबोर रहता है। सौंदर्यीकरण के साथ बढ़ी सुरक्षा और सामाजिक समरसता इस लाइटिंग अभियान का मुख्य उद्देश्य तालाब क्षेत्र को एक पर्यटन और टहलने योग्य स्थान के रूप में विकसित करना है। रोशनी की उचित व्यवस्था होने से असामाजिक तत्वों पर लगाम अंधेरे का लाभ उठाने वाले असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगेगा। जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल के इस सराहनीय कदम में मुख्य रूप से कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने वालों में अभिमन्यु मीनपाल, तेजनारायण मीनपाल, ठाकुर राम, मुनीराम, सूरज मीनपाल, लिकेश, संतोष,दीपक, एवं विजय मीनपाल सहित भारी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे। इन सभी सहयोगियों ने श्रमदान और प्रबंधन में अपनी महती भूमिका निभाई। जनपद सदस्य का संदेश इस अवसर पर जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल ने कहा ग्रामीणों की सेवा और क्षेत्र का सर्वांगीण विकास ही मेरी पहली प्राथमिकता है। तालाब हमारे गांवों की जीवनरेखा हैं, इनका संरक्षण और सौंदर्यीकरण करना हमारा कर्तव्य है। यह लाइटिंग व्यवस्था तो बस एक शुरुआत है, आने वाले समय में तालाब में पिचिंग (घाट निर्माण) और वृक्षारोपण कर इसे एक आदर्श दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

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