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विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले में जल संरक्षण और हरियाली को नया आयाम

मोर गांव, मोर पानी अभियान के तहत जल संवर्धन और वृक्षारोपण कार्यों से बदल रही ग्रामीण तस्वीर


धमतरी। जिले में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना रहा है। वहीं व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रुप से मोर गांव, मोर पानी अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और वर्षाजल के अधिकतम संचयन के उद्देश्य से प्रभावी रुप से संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेन्द्र सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में जिले के धमतरी, कुरुद, मगरलोड, नगरी विकासखंड में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरुप दिया गया है। अभियान के अंतर्गत ग्रामीणों की सहभागिता से गांव-गांव में जल संरचनाओं का निर्माण, मरम्मत एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है जिससे जल उपलब्धता में वृद्धि होने के साथ-साथ कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिल रही है। मोर गांव, मोर पानी अभियान के तहत जिले में नवा तरिया, तालाब गहरीकरण, आजीविका डबरी निर्माण तथा जल निकासी संरचनाओं का निर्माण एवं मरम्मत कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से वर्षाजल का संचयन हो रहा है तथा भू-जल स्तर में सुधार देखने को मिल रहा है। अनेक ग्राम पंचायतों में वर्षों से उपेक्षित जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया गया है। तालाबों की सफाई और गहरीकरण से उनकी जलधारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे ग्रामीणों को सिंचाई, पशुपालन एवं घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो रहा है। जिले में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्य किए जा रहे हैं। पंचायतों में सामुदायिक भूमि, चारागाह क्षेत्र, स्कूल परिसर, पंचायत भवन परिसर, सड़क किनारे तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण किया गया है। फलदार एवं छायादार पौधों के रोपण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। आम, जामुन, अमरुद, नीबू, करंज, सागौन, अर्जुन, नीम, बरगद, पीपल एवं अन्य स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है। मोर गांव, मोर पानी अभियान की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी है। ग्राम सभाओं के माध्यम से जल संरक्षण कार्यों की योजना बनाई जा रही है तथा ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुरुप कार्यों का चयन किया जा रहा है।

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