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यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा वन डे साइकिल डे से दिया पर्यावरण और सेहत का संदेश

​धमतरी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया इकाई धमतरी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अनूठा और संवेदनशील कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था के तत्वावधान में जहाँ एक ओर वन डे साइकिल डे का आयोजन कर लोगों को प्रदूषण मुक्त आवागमन के लिए प्रेरित किया गया, वहीं दूसरी ओर विकास के नाम पर काटे गए वृक्षों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।कार्यक्रम की शुरुआत ‘वन डे साइकिल डे’ अभियान के साथ हुई, जिसमें संस्था के पदाधिकारियों, युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने बड़ी संख्या में साइकिल चलाकर शहर का भ्रमण किया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनता को यह संदेश देना था कि ईंधन की खपत को कम करके और साइकिल को अपनी दिनचर्या में शामिल करके हम न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचा सकते हैं, बल्कि खुद को भी स्वस्थ रख सकते हैं। साइकिल चालकों के उत्साह ने पूरे शहर को पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित किया।इस कार्यक्रम में यूथ हॉस्टल एसोसिएशन धमतरी इकाई के अध्यक्ष रमेश देव , चेयरमैन हुकुम चंद जैन ,उपाध्यक्ष मनीष चंद्राकर सचिव सुबोध महावर ,कोषाध्यक्ष व्यंकतेश साहू,धनंजय सोनकर, योगेश गुप्ता,कार्यकारिणी सदस्य कमलेश कोठरी,चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष कैलाश कुकरेजा,घनश्याम सोनी,प्रोफेसर पीसी चौधरी, नरेन्द्र जैन,काजल मुंजवानी, एकता सिंह, विजय अग्रवाल, डॉ भूपेंद्र साहू,दीक्षा साहू आदि शामिल रहे.

​काटे गए वृक्षों के लिए रखा 2 मिनट का मौन: एक अनोखी श्रद्धांजलि

इस आयोजन का सबसे भावुक और विचारणीय क्षण वह था, जब धमतरी की टीम ने एक जगह एकत्रित होकर 2 मिनट का मौन धारण किया। यह मौन उन मूक और बेकसूर वृक्षों की याद और सम्मान में रखा गया, जो आधुनिक विकास, सड़कों के चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ गए। संस्था के सदस्यों ने कहा कि जिन पेड़ों ने दशकों तक हमें ऑक्सीजन, छांव और जीवन दिया, उन्हें खोने का दर्द हमें समझना होगा। यह श्रद्धांजलि समाज और प्रशासन को यह याद दिलाने का एक प्रयास है कि विकास ऐसा हो जो प्रकृति का विनाश न करे।​प्रकृति और प्रगति में संतुलन जरूरी
इस अवसर पर यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, धमतरी इकाई के चैयरमेन हुकूमचंद जैन अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संदेश दिया कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रगति और प्रकृति के बीच संतुलन होना अनिवार्य है। यदि विकास के लिए एक पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले कम से कम दस नए पौधे रोपे और बचाए जाने चाहिए। संस्था के अध्यक्ष रमेश देव ने संकल्प लिया कि इस मानसून सत्र में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा और उनकी देखभाल भी की जाएगी।​

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