स्वर्गधाम की अद्भुत सेवा: 44 लावारिस अस्थियों से लेकर 715 अज्ञात शवों तक का सफर, सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर मृतकों का होगा सामूहिक पिंडदान व तर्पण

धमतरी। अपनों का तर्पण और पिंडदान तो हर कोई करता है, लेकिन जिनके इस संसार में कोई आगे-पीछे नहीं हैं, उनकी आत्मा की शांति का बीड़ा उठाकर धमतरी की ह्यस्वर्गधाम सेवा समितिह्ण एक मिसाल पेश कर रही है। वर्ष 2004 से लावारिस और अज्ञात शवों को ससम्मान सद्गति देने में जुटी यह समिति इस वर्ष सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के पावन अवसर पर 715 अनजान मृतकों का विधिवत सामूहिक पिंडदान व तर्पण करने जा रही है। यह गरिमामय धार्मिक आयोजन 10 अक्टूबर को चित्रोत्पला गंगा के तट पर स्थित रुद्रेश्वर धाम (रुद्री) में प्रातः 10:00 बजे से आयोजित किया जाएगा। सड़े-गले शवों का अंतिम संस्कार और 44 लावारिस अस्थियों को मुक्ति स्वर्गधाम सेवा समिति के महासचिव अशोक पवार ने बताया कि समिति बिना किसी भेदभाव और स्वार्थ के सड़े-गले अज्ञात शवों का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करती आ रही है। अब तक ऐसे 715 मृतकों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। इतना ही नहीं, वर्ष 2004 से कोरोनाकाल तक भिलाई के शांति घाट में 44 ऐसी अस्थियां पड़ी थीं, जिन्हें उनके परिजन लेने नहीं पहुंचे। स्वर्गधाम समिति ने महामहिम राज्यपाल से विशेष अनुमति प्राप्त कर उन सभी 44 अस्थियों का गंगा में विसर्जन किया और अब उनका भी नियमित तर्पण किया जा रहा है।
जनसहयोग से होता है शांतिभोज का आयोजन
रुद्रेश्वर धाम रुद्री गंगा नदी के किनारे समिति हर साल मृतात्माओं का सामूहिक,तर्पण एवं पिंडदान करती है। इस पुनीत कार्य के शहर के सेवाभावी लोगों समेत हजारों लोग साक्षी बनते हैं। सबसे खास बात यह है कि हजारों लोगों के लिए बनने वाले शांतिभोज और तर्पण कार्यक्रम का आयोजन जनसहयोग से होता है। लोग अपने पूर्वजों के नाम से अनाज सहित संभव धनराशि दान के रूप में देते हैं। इस अवसर पर पिंडदान के बाद भजन कार्यक्रम भी होता है। इस साल हसदा मगरलोड की सत्संग सरिता मानस एवं भजन मंडली प्रस्तुति देगी।
अंतिम संस्कार के बाद पहुंचे कई परिजन,वे भी हुए संतुष्ट

महासचिव अशोक पवार ने कहा कि अबतक संस्था 715 अनजान मृतकों का अंतिम संस्कार कर चुकी है। पूर्व में 3 बार ऐसा अवसर आया जब समिति द्वारा अंतिम संस्कार करने के बाद उनके परिजन पहुंचे,लेकिन दफन शव उखड़वाने जैसी अबतक नौबत नहीं आई। परिजन भी समिति के दाह संस्कार से संतुष्ट हुए। परिजनों ने हमे इस पुनीत कार्य के लिए दुआ भी दी।

