भूसा व राख वाहनें राहगीरों व वाहन चालकों के लिये बन रही परेशानी
सही तरीके से पैक नहीं करने से उड़कर आंखों में जाते हैं कण, पुतलियों में चिपकने से होता है असहनीय दर्द
फैलाकर लोड किया जाता है भूसा व राख वाहनों को, रहती है दुर्घटना की आशंका

धमतरी। शहर के भीतर से नेशनल व स्टेट हाईवे से रोजाना कई वाहनें गुजरती हैं। इनमें कुछ वाहनों द्वारा लापरवाही बरती जाती है जो कि हादसों का कारण बन सकती है। इसी प्रकार शहर से होकर कई भूसा व राख गाडियां गुजरती हैं। इस वाहनों में नियमों का पालन नहीं होता बावजूद इसके इन पर कारर्वाई न होना समझ से परे है।
ज्ञात हो कि भूसा और राख ज्यादातर ट्रैक्टर या अन्य बड़े वाहनों में लोड कर ट्रांसपोर्ट किया जाता है। लोडिंग के दौरान भी नियमों का पालन नहीं किया जाता है। वाहनों में इस प्रकार राख व भूसे को लोड किया जाता है कि बाहर तक फैला रहता है। चूंकि शहर के भीतर मार्ग काफी व्यस्त रहता है। रास्ते भी तुलनात्मक रूप से संकरे हैं। ऐसे में किनारे चल रहे अन्य वाहनों या सड़क किनारे लगे फ्लेक्स आदि से टकराने की आशंका बनी रहती है। पूर्व में इस प्रकार की दुर्घटनायें हो चुकी हैं, फिर भी इस प्रकार लापरवाही बरती जा रही है। वहीं भूसा व राख को लोड करने के दौरान वाहनों में उसे पैक करने के दौरान लापरवाही बरती जाती है। उनकी लापरवाही का खामियाजा आम जनता भुगतती है। उक्त वाहनें जब सड़कों पर दौड़ती है तो गलत तरीके से ढंकने, पैक करने के कारण भूसा व राख उड़ते रहता है जो कि पीछे चल रहे राहगीरों, वाहन चालकों के आंख में चला जाता है जिससे उन्हें परेशानी होती है। यदि थोड़ी सावधानी बरती जाये तो लोगों को होने वाली असुविधा से बचा जा सकता है। आंख में भूसे व राख का कण जाने के बाद आंख की पुतलियों में कण चिपक जाता है। आंख में दर्द जलन और आंसू बहने की समस्या उत्पन्न होती है। आंख को मसलने से पुतलियां भी डैमेज हो जाती है। जिससे आंखों को गंभीर नुकसान होता है। ज्यादातर मामलों में आंखों में पड़े भूसे व राख के कण सादे पानी से धोने, कुछ दवाई डालने से नहीं निकलते इसलिये आखिरकार लोगों को डाक्टर के पास जाना पड़ता है। उसके बाद ही आंखों को राहत मिल पाती है। अब लोगों में इस बात की चर्चा है कि यातायात पुलिस द्वारा लगातार सड़क दुर्घटनायें रोकने कार्य किये जा रहे हैं लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे ऐसे वाहन चालकों के हौंसले बुलंद हो चुके हैं। लगातार जांच कारर्वाई के बाद ही इस प्रकार की लापरवाही बंद होगी।
