जिला अस्पताल के दंतरोग विभाग में है सुविधाएं बढ़ाने की दरकार
कई प्रकार के इलाजों की नहीं मिल पाती सुविधा, निजी अस्पतालों में इलाज कराना है मजबूरी

धमतरी। जिला अस्पताल में सुविधाओ का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन आज भी कई सुविधाओं की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में मरीजो को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ता है। ऐसा ही हाल जिला अशासकीय अस्पतालों के दंत रोग विभाग का है। यहां समय के साथ फैसेलिटी को बढ़ाई गई है लेकिन अभी कई और आधुनिक इलाज दरकार है। बता दे कि कई बार मरीजों को रुट केनाल ट्रीटमेंट, टेढ़े मेढ़े दातों का उपचार, तिरझे और टूटे हुए दांतो का उपचार, जबड़ा ट्रांसप्लांट, नये दांत लगाने सहित कई प्रकार के उपचार की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाती है। बता दे कि इन बीमारियों व तकलीफो का ईलाज निजी अस्पतालों में मंहगे दामों पर होता है। और कई बार अस्पताल आना पड़ता है। हर बार भारी भरकम फीस चुकानी पड़ती है। या फिर एक बार में ही ईलाज का पैकेज हजारों में बता दिया जाता है। चर्चा के दौरान कई मरीजों ने बताया कि जिला अस्पताल में पर्याप्त दवाईयां भी कई बार नहीं मिल पाती। दवाईयां बाहर से भी लेनी पड़ती है। चर्चा के दौरान लोगों ने जिला अस्पताल में दंत रोग के बेहतर उपचार की सुविधा देने की मांग की है। लोगो ने कहा कि 225 बिस्तरों वाला अस्पताल होने के बाद भी सामान्य बीमारियों का बेहतर उपचार न मिल पाना चितंन का विषय है। उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में पदस्थ दंत चिकित्सक द्वारा लगातार बेहतर सेवाएं दी जा रही है। लेकिन अस्पताल मे कभी कभी सुविधाओं की कमी के चलते कुछ मरीजो को बेहतर उपचार की सुविधा मिलने में परेशानी होती है।
जिले में है दंत रोग के हजारों मरीज
मिली जानकारी के अनुसार नियमित बेहतर और सभी तरीके से दांतो की सफाई नहीं करने के जिले में लगातार दंत रोग के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में बड़ी संख्या में गुटका, तम्बाकू खाने के आदी है और सालों तक लगातार इनका सेवन करने से दांतो में कई प्रकार की खराबी आ रही है। गुटका वाले अधिकांश मरीजों में सडऩे, दांतो में गेप, दांतो का टूटना, मसूड़ो का फूलना, पिलपिला होना जैसी कई प्रकार की बीमारियां आम है। वहीं कई बार मरीजों में मुंह के कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो जाती है. दांतो में संबंधित सबसे ज्याद रुट केनाल ट्रीटमेंट, दांतो की कैपिंग फिलिंग, दांत निकालना, तार लगाना आदि इलाज की आवश्यकता सबसे ज्यादा पड़ती है।