शहर सीमा का दशकों से नहीं हो पाया विस्तार, शहर से लगे गांवो के लिए बन रहे विकास के बड़े प्रोजेक्ट
शहर में जगह की खल रही कमी, 49 साल पहले 1976 में हुआ था शहर का विस्तार
बढ़ी आबादी, बढ़ेे संसाधन लेकिन नहीं बढ़ी सीमा, अब कम पड़ रही विकास के लिए जगह

धमतरी। धमतरी शहरी सीमा का विस्तार लगभग 5 दशक से नहीं हो पाया है। ऐसे में स्थिति अब ऐसी हो गई है कि शहर का विकास आसपास के गांवो में शिफ्ट हो रहा है। अब शहर में विकास के बड़े प्रोजेक्ट के लिए जगह नहीं बची है।
बता दे कि 49 साल पहले 1976 में धमतरी शहरी सीमा का विस्तार हुआ था। तत्कालीन सरकार द्वारा शहर से लगे गांव सोरिद, बठेना, दानीटोला, गोकुलपुर, हटकेशर को शहर में शामिल किया गया था। इसके बाद आज तक शहरी क्षेत्र का विस्तार नहीं पो पाया है। बता दे कि इस दौरान धमतरी नगर पालिका से नगर निगम बन गई तब भी शहरी सीमा का विस्तार नहीं किया गया। निगम के लिए आवश्यक न्यूनतम 40 वार्डो की शर्त को पूरा करने शहर के 36 वार्डो का परिसीमन कर 40 वार्ड किया गया। चार नये वार्ड बनाये गये। इस दौरान भी शहर सीमा का विस्तार नहीं हो पाया। इसके बाद भी शहरी सीमा को बढ़ाने आसपास के कई गांव जो शहर से लगे हुए है। उन्हें धमतरी निगम क्षेत्र में जोडऩे का प्रयास किया गया, लेकिन जटिल प्रक्रियाओं और अन्य कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि बीते 49 सालों में शहर की आबादी कई गुणा बढ़ गई है। संसाधन व्यापार वाहने बढ़ गये है। शहर में अब विकास के बड़े प्रोजेक्ट के लिए जगह की किल्लत हो रही है। मजबूरन विकास कार्यो को आसपास के गांवो में शिफ्ट करना पड़ रहा है।
हाईटेक बस स्टैण्ड, गोकुलनगर, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सहित कई प्रोजेक्ट गांव में
बता दे कि जगह की अनुपलब्धता के कारण विकास शहर से लगे गांवो में शिफ्ट हो रहे है। हाईटेक बस स्टैण्ड अर्जुनी में, गोकुलनगर के लिए सोरम में जगह प्रस्तावित है, रत्नाबांधा में चौपाटी निर्मित होना है। सीवरेज वाटर ट्रींटमेंट प्लांट मुजगहन में बन रहा है। इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज ट्रांसपोर्ट नगर कृषि कॉलेज सहित कुछ अन्य विकास के प्रोजेक्ट शहर के बजाय आसपास के गांवो में प्रस्तावित है। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें शहर से जुडऩे में आपत्ति है, क्योंकि शहर क्षेत्र में टैक्स ज्यादा लगता है।