जापान की मियावॉकी पद्धति से रुद्री व भखारा के पचपेड़ी में रोपे गए 20 हजार पौधे, दो साल में ही पौधो की ऊंचाई हुई 12 से 15 फीट
हाई डेनसिटी वाली इस पद्धति से पौधरोपण की लागत हुई कम, कम भूमि पर लगे ज्यादा पौधे, पौधे से पेड़े बनने का रेसियो भी हुआ ज्यादा

धमतरी। आज न सिर्फ भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। यदि हम आज प्रकृति द्वारा नवाजे गए संसाधनों का संरक्षण नहीं करेंगे तो हमारी आने वाली पीढिय़ों के लिए समान्य जीवन मुश्किल हो जाएगा। आज विश्व पर्यावरण दिवस है। इस अवसर पर पौधरोपण व पर्यावरण संरक्षण को बढावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धमतरी वन विभाग द्वारा दो साल पूर्व किये गये कार्य आज सार्थक साबित हो रहा है।
धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि धमतरी के रुद्री पुलिस लाईन व आसपास एवं भखारा के पचपेड़ी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा जापान मियावाकी पद्धति से पौधरोपण लगभग दो वर्ष पूर्व किया गया था। दोनो ही स्थानों में 10-10 हजार इस प्रकार कुल 20 हजार पौधे रोपे गए थे। और मात्र दो सालों के अल्प समय में ही रोपे गए पौधे 12 से 15 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुके है। इस पद्धति से पौधरोपण की लागत कम हुई। कम जगह पर ज्यादा पौधे रोपे गए। पौधो का ग्रोथ सामान्य पौधरोपन से ज्यादा है और पौधो के पेड़ बनने का रेसियों भी ज्यादा है। जिससे यह प्रयास सार्थक साबित हो रहा है। और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को पूरा करते हुए नजर आ रहा है।
मियावॉकी पद्धति से पौधरोपण के है यह लाभ
मियावॉकी पद्धति से पौधरोपण के कई लाभ है। इस पद्धति के तहत कम भूमि में अधिक संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाते है, जिससे कम समय में घना और प्राकृतिक जंगल विकसित होता है।। जानकारी के अनुसार मियावाकी पद्धति जापान के वनस्पति वैज्ञानिक अकिरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई तकनीक है, जिसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधों को सघन रूप से लगाया जाता है। इस पद्धति से तैयार वन सामान्य पौधरोपण की तुलना में तेजी से विकसित होते हैं और जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं। इस पद्धति से क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी तथा पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलेगी। मियावाकी पद्धति से विकसित होने वाला यह हरित क्षेत्र भविष्य में पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है।
पास-पास पौधरोपण से पौधो मे आपस में ही होता पानी व धूप के लिए कॉम्पीटिशन
श्री जाधव ने बताया कि आज के दौर में मियावॉकी पद्धति कारगर है। रुद्री व पचपेड़ी में जो पौधे लगाए गए थे इनकी ग्रोथ नेचुरल है। कुछ अलग या विशेष प्रयास नहीं किये गये है। दरअसल पौधो को पास-पास लगाने से पौधो में आपस में ही नीचे जड़ो से पानी खींचने व उपर धूप लेने का कॉम्पीटिशन होता है। भविष्य में शहरी व आसपास के राजस्व क्षेत्रो में भी मियावॉकी पद्धति से पौध रोपण कियें जाएगें।
लगाए गए थे सभी प्रकार के पौधे
धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि रुद्री व पचपेड़़ी में मियावॉकी पद्धति से हुए पौधरोपण के दौरान सभी प्रकार के पौधो जैसे नीम, आम, चीकू, बरगद, आवला, पीपल, अमरुद, अर्जुन, सिंदूरी सहित औषधि गुणो वाले पौधे, फलदार पौधे, बेहतर ऑक्सीजन देने वाले सहित अन्य पौधे रोपे गए है।
सिर्फ पौधे लगाना ही नहीं बल्कि पेड़ बनाना हमारा उद्देश्य हो – डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव

धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने आज विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों से अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी का सामूहिक जिम्मेदारी व कर्तव्य है। सिर्फ पौधे लगाना ही हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए। बल्कि पेड़ बनाना हमारा उद्देश्य हो। जल, थल, वायु किसी प्रकार के प्रदूषण को हमे रोकने के लिए स्वयं शुरुआत करनी होगी। लोकल एक्ट से ग्लोबल इफेक्ट पड़ता है। यदि हम प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे तो पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को पाये जा सकता है।
