वीबीजी रामजी के तहत जिले के स्कूलों में होगा अधोसंरचना विकास का व्यापक विस्तार
लगभग 200 बालिका शौचालय, किचन शेड, मल्टी स्पोट्र्स सहित अनेक निर्माण कार्यों से सुदृढ़ होगी शैक्षणिक व्यवस्था

धमतरी। वीबीजी रामजी योजना (विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी के अंतर्गत जिले के विभिन्न स्कूलों में अधोसंरचना विकास के व्यापक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना के तहत लगभग 200 बालिका शौचालयों का निर्माण, किचन शेड, मल्टी स्पोट्र्स सुविधाओं का विकास तथा अन्य आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाएंगे। इन कार्यों से विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, विशेषकर बालिकाओं को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध होगा। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना, स्वच्छ परिसर, सुरक्षित वातावरण और खेल सुविधाएं भी विद्यार्थियों के समग्र विकास में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक विद्यालय में ऐसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने बताया कि योजना के अंतर्गत विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। बालिका शौचालयों के निर्माण से छात्राओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की बेहतर पूर्ति होगी, वहीं किचन शेड के निर्माण से मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन अधिक व्यवस्थित एवं स्वच्छ वातावरण में किया जा सकेगा। इसी प्रकार मल्टी स्पोट्र्स सुविधाओं के विकास से विद्यार्थियों में खेल भावना, शारीरिक दक्षता और टीम भावना का विकास होगा। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि विद्यालय परिसरों को अधिक उपयोगी, आकर्षक एवं छात्र-अनुकूल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार परिसर विकास, मरम्मत, पेयजल एवं स्वच्छता संबंधी सुविधाओं के उन्नयन जैसे कार्य भी शामिल किए जाएंगे, जिससे विद्यालयों की समग्र अधोसंरचना मजबूत हो सके। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जहां वह सुरक्षित, प्रेरणादायक एवं संसाधनयुक्त परिसर में अध्ययन कर सके। बेहतर अधोसंरचना से न केवल विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि विद्यालयों में नामांकन, नियमित उपस्थिति तथा ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

