मनरेगा कानून में बदलाव का उद्देश्य गरीब, किसान और मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार लाना है
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश बैस व भाजपा जिला महामंत्री महेन्द्र पंडित ने कहा कांग्रेस इसका सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से विरोध कर रही है
उक्त योजना ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और लोक कल्याण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा

धमतरी। मनरेगा कानून में बदलाव ग्रामीणो अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने व मजदूरो को उनके अधिकार बेहतर तरीके से प्रदान करने के उद्देश्य से किये जा रहे है। कांग्रेस इसका सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से विरोध कर रही है। उक्त बाते भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश बैस व भाजपा जिला महामंत्री महेन्द्र पंडित ने कही।
श्री बैस व श्री पंडित ने आगे कहा कि कांग्रेस के पास आज कोई मुद्दा नहीं रह गया है, इसलिए वह लोक कल्याण तथा ग्रामीण विकास को सुनिश्चित करने वाली योजनाओं का विरोध करके अपनी राजनीतिक कुण्ठा का प्रदर्शन कर रही है। छत्तीसगढ़ में विकसित भारत – जी राम जी अधिनियम 2025 को लेकर कांग्रेस के प्रस्तावित आंदोलन पर पलटवार करते हुए कहा कि मुद्दों की कंगाली से जूझ रही कांग्रेस के नेता जनहितकारी योजनाओं को लेकर जनता को बरगलाने के बजाय कांग्रेस बचाओ अभियान चलाने में अपनी ऊर्जा लगाएँ। वीबी जी-राम-जी योजना के नाम पर कांग्रेस जनता में भ्रम पैदा कर रही है।
वीबी – जी राम जी योजना के लाभ गिनाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश बैस व भाजपा जिला महामंत्री महेन्द्र पंडित ने कहा कि यह योजना ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और लोक कल्याण की दिशा में मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, मजदूरों के लिए समर्पित व प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा लाया गया विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजग़ार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 अब पूर्ववर्ती मनरेगा योजना का स्थान लेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य गरीब, किसान और मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इस नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की वार्षिक आय में बड़ी वृद्धि सुनिश्चित होगी। मजदूरों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इसमें यह प्रावधान किया गया है कि अब मजदूरी का भुगतान मात्र 7 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यदि भुगतान में किसी भी प्रकार का विलंब होता है, तो मजदूर को मुआवजे के रूप में अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी। इससे श्रमिकों के आर्थिक अधिकारों की रक्षा होगी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

