उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व टीम एवं शिक्षको द्वारा उड़न गिलहरी के बच्चे का सफल रेस्क्यू कर मिलाया गया माँ से
रात भर वन विभाग की टीम ने मौके से सुरक्षित दूरी बनाकर माँ के आने का इन्तेजार किया, ट्रैप कैमरा लगाया गया

बिलासपुर के वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अभिजीत शर्मा, रेंजर केजूराम कोरचे, वनरक्षक सुधांशु वर्मा, पेट्रोलिंग श्रमिक सूरज पात्रा, राजेंद्र नागेश ने रेस्क्यू किया ऑपरेशन
वनमंत्री केदार कश्यप, पी सी सी एफ वन्यप्राणी अरुण पाण्डेय एवं फील्ड डायरेक्टर श्रीमती रातोविशा समाजदार के मार्गदर्शन में उड़न गिलहरी के बच्चे का सफल रेस्क्यू कर उसकी माँ से मिलाया गया. मैनपुर के जर्नलिस्ट श्री हसन खान एवं रक्षापथरा प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक धनसिंह नेगी द्वारा दिनांक 25 फरवरी को सुबह 11:50 बजे उपनिदेशक कार्यालय को सूचना दी गयी कि गोना जाने वाले मार्ग पर एक सूखा धावड़ा का वृक्ष गिर गया है एवं उस वृक्ष पर एक अज्ञात जानवर (उड़न गिलहरी का बच्चा) अकेला बैठा है एवं चींटियो द्वारा चोटिल किया जा रहा है तत्काल उड़न गिलहरी के बच्चे का रेस्क्यू शुरू किया गया. शिक्षको द्वारा बच्चे को स्कूल में छाव में ले जाया गया तौरेंगा (बफर) परिक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची और उड़न गिलहरी के बच्चे को अपनी कस्टडी में लेकर मौके का मुआयना किया. मौके पर सूखे धावड़ा वृक्ष में उड़न गिलहरी का घोंसला/कोटर पाया गया किन्तु बच्चे की माँ नहीं मिली. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अभिजीत शर्मा द्वारा दिए गये सुझाव अनुसार उड़न गिलहरी के बच्चे को पीपल, बड के फल खिलाये एवं पानी पिलाया गया. चूँकि उड़न गिलहरी निशाचर (रात्रि में विचरण करने वाले) होते है इसीलिये शाम होने तक इन्तजार किया गया ताकि रात्रि में यदि माँ आस पास होगी तो बच्चे को लेने की संभावना होगी.रेस्क्यू टीम ने शाम होते ही बच्चे को वापिस जंगल के पास साजा वृक्ष पर छोड़ दिया और कैमरा ट्रैप (बिना फ़्लैश) लगाया गया और सुरक्षित दूरी से नजर रखी गयी रात्री लगभग 10 बजे मादा उड़न गिलहरी की हलचल हुई और 2 घंटे में बच्चे को लेकर वापिस जंगल की ओर चली गयी. अगले दो दिनों तक टीम आस पास के जंगलो की निगरानी रखेगी ताकि मादा उड़न गिलहरी और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व की टीम शिक्षको धनसिंह नेगी, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अभिजित शर्मा एवं जर्नलिस्ट हसन खान के इस रेस्क्यू ऑपरेशन में योगदान के लिए सराहना करती है.